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सिफलिस(उपदंश) कà¥à¤¯à¤¾ है?
सिफलिस à¤à¤• à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ (यौन संचारित रोग) है जो टà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤®à¤¾ पैलिडम बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है। इस घातक यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£ का यह पहला संकेत सिरà¥à¤« à¤à¤• छोटा, दरà¥à¤¦ रहित घाव है, जिसे लोग तà¥à¤°à¤‚त नोटिस करने में विफल रहते हैं। यह घाव, जिसे चिकितà¥à¤¸à¤•ीय रूप से चेंकà¥à¤° के रूप में जाना जाता है, आपके मलाशय में, यौन अंग में या यहां तक ​​कि मà¥à¤‚ह के अंदर à¤à¥€ दिखाई दे सकता है।
सिफलिस(उपदंश) के सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
सिफलिस के चार सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ होते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•, सेकेंडरी, गà¥à¤ªà¥à¤¤ और तृतीयक सिफलिस कहा जाता है।
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ: यह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के संपरà¥à¤• में आने के 3-4 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद होता है। यह रोग चेंकà¥à¤° नामक à¤à¤• छोटे, गोल घाव के रूप में शà¥à¤°à¥‚ होता है जो दरà¥à¤¦ रहित लेकिन अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• होता है। यह घाव जननांगों, मà¥à¤‚ह और मलाशय में पà¥à¤°à¤•ट हो सकता है। घाव लगà¤à¤— 6 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक रहता है।
सेकेंडरी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ: इस सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर रैशेज और गले में खराश हो सकती है। हथेली, तलवों में रैशेज हो सकते हैं और उनमें खà¥à¤œà¤²à¥€ नहीं होती है। बà¥à¤–ार, वजन घटना, थकान, जोड़ों में दरà¥à¤¦, सिरदरà¥à¤¦ अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ हैं।
अवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ: इसे अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ ""छिपी अवसà¥à¤¥à¤¾"" कहा जाता है। पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• और माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के लकà¥à¤·à¤£ गायब हो जाते हैं, और इस सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में कोई धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने योगà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ नहीं देखे जा सकते हैं। हालांकि, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में बने रहते है और तृतीयक अवसà¥à¤¥à¤¾ में आगे बढ़ने से पहले यह अवसà¥à¤¥à¤¾ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक लंबी हो सकती है।
तृतीयक सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ: यह सिफलिस का अंतिम सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ है जो à¤à¤• दशक के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बाद विकसित हो सकता है। यह à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ है। सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ हानि, शà¥à¤°à¤µà¤£ हानि, मानसिक बीमारी, अंधापन, मेनिनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•, हृदय रोग और नà¥à¤¯à¥‚रोसाइफिलिस इस सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ के संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ परिणाम हैं।
सिफलिस(उपदंश) के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
सिफलिस यौन संपरà¥à¤• से फैलता है और सिफलिस के लिठपà¥à¤°à¤®à¥à¤– अपराधी à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का नाम टà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥‹à¤¨à¤¿à¤®à¤¾ पैलिडम है। यह रोग आमतौर पर जननांगों, मलाशय में दरà¥à¤¦ रहित घाव के रूप में शà¥à¤°à¥‚ होता है। इस तरह के घावों के साथ तà¥à¤µà¤šà¤¾ या शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤® à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ के संपरà¥à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से रोग संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• होता है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के आधार पर, सिफलिस के संकेत और लकà¥à¤·à¤£ अलग-अलग होते हैं।
पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में छोटे और दरà¥à¤¦ रहित घाव दिखाई देते हैं। बढ़े हà¥à¤ कमर के पास लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸ को नोट किया जा सकता है।
सेकेंडरी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को योनि, गà¥à¤¦à¤¾, मà¥à¤‚ह, तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡, बà¥à¤–ार, बालों का à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾, वजन कम होना, सिरदरà¥à¤¦, थकान, मांसपेशियों में दरà¥à¤¦ हो सकता है।
तृतीयक सिफलिस को सबसे गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ माना जाता है जिसमें सà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾, बहरापन, मनोà¤à¥à¤°à¤‚श, हृदय रोग, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और रीढ़ की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में संकà¥à¤°à¤®à¤£, धमनीविसà¥à¤«à¤¾à¤° और रकà¥à¤¤ वाहिका सूजन होती है।
सिफलिस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने पर शिशà¥à¤“ं को हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚, पीलिया, बà¥à¤¾ हà¥à¤† लिवर, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा संबंधी मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ और नाक से सà¥à¤°à¤¾à¤µ का अनà¥à¤à¤µ हो सकता है।
सिफलिस(उपदंश) का पता कब तक चल सकता है?
सिफलिस à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है। शरीर में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के आकà¥à¤°à¤®à¤£ के बाद, आमतौर पर किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£ जैसे कि कैंसर या शरीर में दरà¥à¤¦ को विकसित करने में लगà¤à¤— तीन सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ लगते हैं। इसका मतलब है कि à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में औसतन 10 से 90 दिनों तक सिफलिस का पता नहीं चल पाता है। हालाà¤à¤•ि इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में रहता है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इस अवधि के दौरान अनà¥à¤¯ लोगों को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकता है, हालांकि वह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ सिफलिस(उपदंश) अपने आप दूर हो सकता है?
सिफलिस à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥‹à¤¨à¥à¤®à¥à¤– होता है या हलà¥à¤•े लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का कारण बनता है जो किसी का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं जाता है। रोग के पूरà¥à¤£ इलाज के लिठउचित उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, हालांकि, कà¥à¤› मामलों में लकà¥à¤·à¤£ कम दिखने के कारण दवा का पालन नहीं किया जाता है। à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का à¤à¤• पूरा कोरà¥à¤¸ अनिवारà¥à¤¯ है अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ पà¥à¤¨à¤°à¤¾à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ की अधिक संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है। सिफलिस अपने आप दूर नहीं जा सकता है और अगर अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाठतो गंà¤à¥€à¤° जटिलताà¤à¤‚ हो सकती हैं।
सिफलिस(उपदंश) कैसे फैलता है?
सिफलिस à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में चेंकà¥à¤° के सीधे संपरà¥à¤• में आने से फैलता है जो कि à¤à¤• सिफिलिटिक घाव है। ये चांसरà¥à¤¸ बाहरी अंगों के आस-पास, बट के आसपास, योनि में या मलाशय में या मà¥à¤‚ह के अंदर और आसपास बना सकते हैं।
योनि, गà¥à¤¦à¤¾ या ओरल सेकà¥à¤¸ के दौरान, सिफलिस संसà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ हो सकता है। जब गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को सिफलिस होता है, तो वह इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को अजनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ तक पहà¥à¤‚चा सकती है। इसलिà¤, बचà¥à¤šà¥‡ को संसà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ से बचने के लिठगरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने से पहले à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग के लिठजाना बेहतर है।
कà¥à¤¯à¤¾ सिफलिस(उपदंश) दूर होता है?
सिफलिस à¤à¤• जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶à¥‹à¤¨à¥à¤®à¥à¤– होता है। लकà¥à¤·à¤£ हलà¥à¤•े होते हैं और यह किसी का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं रहता है। सिफलिस आमतौर पर विकसित होता है और गà¥à¤ªà¥à¤¤ रूप से अपने आप दूर हो जाता है। उपचार पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ सà¥à¤µà¤¤à¤ƒà¤¸à¥à¤«à¥‚रà¥à¤¤ होती है लेकिन संकà¥à¤°à¤®à¤£ को ठीक करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के परामरà¥à¤¶ के बाद दवा लेना आवशà¥à¤¯à¤• है।
कà¥à¤¯à¤¾ आप यौन रूप से सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ हà¥à¤ बिना सिफलिस(उपदंश) हो सकता हैं?
सिफलिस à¤à¤• यौन संचारित रोग है, लेकिन संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ संà¤à¥‹à¤— के बाद ही संकà¥à¤°à¤®à¤£ होना आवशà¥à¤¯à¤• नहीं है। रोग पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के जननांगों (लिंग या योनी), मà¥à¤‚ह या मलाशय के निकट संपरà¥à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से अनà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। यदि शरीर पर चकतà¥à¤¤à¥‡ या घाव मौजूद हैं, तो इसे दूसरों पर पारित किया जा सकता है। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला से उसके बचà¥à¤šà¥‡ में à¤à¥€ टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिट हो सकता है।
सिफलिस(उपदंश) के लिठउपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
शीघà¥à¤° निदान के बाद सिफलिस को शीघà¥à¤° ही ठीक किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में à¤à¤‚टी-माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² पेनिसिलिन के साथ इलाज किया जाता है जिसमें जीवों को मारने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है जो सिफलिस का कारण बनते हैं। यदि रोगी पेनिसिलिन-à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो उसका इलाज किसी अनà¥à¤¯ à¤à¤‚टीबायोटिक से किया जा सकता है। यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से कम समय तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रहता है तो पेनिसिलिन की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• रोग की पà¥à¤°à¤—ति को रोक सकती है।
यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक समय से सिफलिस से पीड़ित है, तो उसे अतिरिकà¥à¤¤ खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है। यदि सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो यह लिवर, हृदय, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकती है। सिफलिस से अंधापन और लकवा à¤à¥€ हो सकता है। यह à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ फैलाने का अवसर बनाता है। यह घातक है जब à¤à¥€ अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ सिफलिस(उपदंश) 100% इलाज योगà¥à¤¯ है?
सिफलिस को उचित और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ उपचार से आसानी से ठीक किया जा सकता है। यदि इसे अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो यह गंà¤à¥€à¤° जटिलताà¤à¤‚ पैदा कर सकता है। उपचार योजना में डॉकà¥à¤Ÿà¤° के साथ उचित परामरà¥à¤¶ के तहत पसंदीदा à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का आवेदन शामिल है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से इलाज करने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक का कोरà¥à¤¸ पूरा किया जाना चाहिà¤à¥¤
सिफलिस(उपदंश) की जटिलताà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
जैसा कि हमने पहले ही चरà¥à¤šà¤¾ की है, अगर इलाज न किया जाठतो सिफलिस पूरे शरीर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता है। यह à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के जोखिम को à¤à¥€ बढ़ाता है और महिलाओं में गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा कर सकता है। हालांकि उपचार à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में होने वाले नà¥à¤•सान को रोकने में मदद करते हैं, लेकिन नà¥à¤•सान की à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ संà¤à¤µ नहीं है।
सिफलिस(उपदंश) से बचाव के उपाय कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
सिफलिस से बचने के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ सेकà¥à¤¸ का पूरà¥à¤µà¤¾à¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ सबसे आदरà¥à¤¶ तरीका है। यौन खेल के दौरान कंडोम का उपयोग करना और इसके अलावा ओरल सेकà¥à¤¸ के दौरान डेंटल डैम या कंडोम का उपयोग करना, सेकà¥à¤¸ टॉयज साà¤à¤¾ करने से बचें, à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆ की जांच के लिठजाà¤à¤‚ और अपने साथी के साथ परिणाम साà¤à¤¾ करें, सà¥à¤ˆ साà¤à¤¾ करने से बचने से सिफलिस को रोकने में मदद मिलती है।
सिफलिस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ योनि, गà¥à¤¦à¤¾ और मà¥à¤– मैथà¥à¤¨ से बचना बेहतर है। सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• उपायों का उपयोग करने से à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो जाती है। अपने सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को सिफलिस से बचाने का à¤à¤• और तरीका है, नियमित रूप से à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ जांच करवाà¤à¤‚। हर à¤à¤• लिंग के लिठà¤à¤• कंडोम का उपयोग करने से आप सिफलिस से काफी हद तक बच सकते हैं।
सिफलिस(उपदंश) के घरेलू उपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
चाय के पेड़ का तेल(टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल): यह à¤à¤• जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ और सूजनरोधी à¤à¤œà¥‡à¤‚ट है और चाय के पेड़ के तेल का सामयिक उपयोग सिफलिस से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ दरà¥à¤¦ को कम करता है। बादाम के तेल या पानी के साथ तेल को पतला करें और सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® परिणाम देखने के लिठइसे संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ जगह पर लगाà¤à¤‚।
दही: कम पà¥à¤°à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृत खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के साथ पूरक आहार लेना जारी रखें और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को बढ़ावा देने और सूजन को कम करने के लिठबहà¥à¤¤ सारे ताजे खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का उपयोग करें। परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी पीने से विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकाला जा सकता है। पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ के लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤¸ उपà¤à¥‡à¤¦ अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैं जो पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बढ़ावा देते हैं। यह फंगल, यीसà¥à¤Ÿ और यूटीआई इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाता है।
à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾: यह जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ और सूजनरोधी जड़ी बूटी तà¥à¤µà¤šà¤¾ को हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ करने और घावों को à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करती है। यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ाता है और यह सलाह दी जाती है कि सामयिक अनà¥à¤ªà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के लिठजैल और पेय के लिठरस दोनों का सेवन करें। à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ घावों और निशान छोटो के इलाज में काफी हद तक मदद करता है।
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